विचार : गैर बराबरी धर्म नहीं है

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राजनीतिक अत्याचार सामाजिक अत्याचार की तुलना में कुछ भी नहीं है और जो सुधारक समाज की अवज्ञा करता है वह सरकार की अवज्ञा करने वाले राजनीतिज्ञ से ज्यादा साहसी हैं. 
                                                                                                --बी.आर.अम्बेडकर

कई बार मैं ये सोचने में खुद को असमर्थ महसूस करता हु की भला कैसे देश के लोग इतने अंधे हो सकते है की कह दे की देश में जातिवाद न कभी था न है..लेकिन आरक्षण के कारण अब देश में जातिवाद आ रहा है. ऐसा कहने वाले बहुत से लोग अशिक्षित है लेकिन हाल ही में कुछ शिक्षित प्रतिष्ठित लोगे ने इसी सन्दर्भ में ऐसे बयान दिए.
अभिव्यक्ति की आज़ादी के कारण मैं उन्हें उनकी जैसी भाषा मे जवाब नही दूंगा बावजूद इसके की उनका बयान सही नही है लेकिन उनके बयान के विपक्ष में अपने तर्क अवश्य दूंगा.

अमन जांगड़ा 
महाराष्ट्र में आज भी दलितों के साथ मराठवाडा और महारवाड़ा के नाम पर शोषण होता है...उनकी बस्तियां गंदी सुविधा रहित होती है...
ऐसे बयान देने वालो को आज एक बार आत्मचिंतन के लिए भगाणा(स्वयं का गांव) ,मिर्चपुर,भाटला, गोहाना के उन लोगो के पास जाकर बैठने की आवश्यकता है जो हाल फिलहाल के ही बीते दशक से जातिवाद के ही कारण सामाजिक बहिष्कार झेल रहे है....

जातिगत उत्पीड़न एक नज़र 

24/10/2017 के दैनिक भास्कर में एक हत्या की खबर छपती है....हत्या गया के एक सरकारी स्कूल की 10वी कक्षा में पढ़ने वाले छात्र की...सुनकर लगता है की आम हत्या होगी लेकिन हत्या के पीछे वही जातिवाद का कारण था....वो लड़का अन्य पिछड़ा वर्ग(OBC) जाति से संबंध रखता था और कक्षा का मॉनिटर बना दिया गया...जाति से तथाकथित दबंगो को रास नही आया और उसकी हत्या कर दी गयी...
जब रोहित वेमुला नाम के एक शोधार्थी ने कथित जातिवाद के कारण हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में आत्महत्या करने जैसा कदम उठा लिया उसके बाद एक समाचार वेबसाइट(DNA INDIA) ने एक सर्वेक्षण किया जो आंकड़े आये वो वास्तव में चौकाने वाले थे देश की केवल सेंट्रल यूनिवर्सिटीज में बीते 7 साल में 20 से अधिक दलित छात्र जातिवाद के कारण आत्महत्या कर चुके है...इस रिपोर्ट को तैयार करने के लिए क्या पैमाना अपना गया कैसे सर्वेक्षण किया गया ये आप DNA INDIA से जाकर पढ़ सकते है....
वर्ष 2014 में हरियाणा के दौलतपुर गांव में एक नवयुवक का हाथ सिर्फ इसलिए काट दिया गया क्योंकि उसने ऊंची जाति के व्यक्ति के खेत में रखे मटके से पानी पी लिया....
रोहतक के एक गांव खेड़ी साध में वर्ष 2014 में सामुदायिक श्मशान में एक बजुर्ग का दाह संस्कार नही होने दिया कारण वो पिछड़ी जाति से था...यानि आप चाहे मर जाइए लेकिन आज़ाद नही हो सकते...

‌आरक्षण-जातिवाद और धार्मिक अंधापन...

इतने सारे जातिय उत्पीड़न के मामले देखकर भी यदि आप मानते है की देश में जातिवाद नही है तो कहि न कहि शायद आपकी मानसिकता में ही विकार हो सकता है... कुछ कुतर्को में ये बात भी शामिल है की आरक्षण देश में जातिवाद को बरकरार रख रहा है इसलिए इसे खत्म कर देना चाहिए.....उन लोगो के लिए मैं एक प्रश्न रखता हु की आपको यदि ये लगता  है की आरक्षण गलत है तो  आप जातिवाद का विरोध क्यो नही करते...आखिर आरक्षण है भी तो जाति के ही आधार पर...यदि जातिवाद ही न रहे जातिगत ढांचा ही न रहे तो आरक्षण का कोई तल न रहेगा और आरक्षण स्वयं खत्म हो जाएगा...
लेकिन अब आपको ये अपने धर्म के खिलाफ लगेगा की जातिगत ढांचे को तोड़ा जाए...लेकिन जो धर्म मुझे केवल इसलिए दुसरो से कम आंके की मेरा जन्म पिछड़े वर्ग की जाति में हुआ है तो मैं ऐसे धर्म को धिक्कारता हु दुत्कारता हु...मैं ऐसे धर्म को कतई नही मानूंगा.


अमन जांगड़ा 
मूलतः भागना हिसार के निवासी है और फ़िलहाल ग्यारहवीं के छात्र हैं. सामाजिक आन्दोलनों में बढ़चढ़ के हिस्सा लेते हैं! ए पी जे अब्दुलकलाम विचार मंच के ज़रिये छात्र युवाओं में सामाजिक बराबरी और वैज्ञानिक सोच विकसित करने की अलख जगा रहे हैं